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अप्रकाशित (परंतु मंचित) नाटक

योगेश त्रिपाठी 

श्री संजय उपाध्याय निर्देशित 'आनंद रघुनंदन' नाटक का विहंगम दृश्य 

              मंचन तिथि - ३० नवम्बर २०१५, स्थल - किला रीवा 

'शत्रुगंध' नाटक देखते दर्शक : भारत भवन 

'तीसरा मंतर' देखते दर्शक 

ऑक्सीजन 

केशवलीला रामरंगीला 

सरोज शर्मा निर्देशित 'शत्रुगंध' नाटक का दृश्य 

इस नाटक के अनुसार, पचासोत्तरी जीवन में पति-पत्नी के बीच एक अनजाना-सा ठंडापन आ जाता है, और ऐसा लगता है मानो प्रेम नाम की चीज कभी थी ही नहीं। बात-बात पर नुक्ताचीनी, झगड़ना और मन-मुटाव मौका देता है किसी दूसरे के प्रवेश का। लेकिन क्या वाकई ऐसा ही होता है ?  प्रेम क्या सचमुच नहीं रहता ? नाम के विपरीत 'ऑक्सीजन' हास्य नाटक है, परंतु दिल को छू लेने वाली वास्तविकता के साथ। इसका मंचन भोपाल के वरिष्ठ रंगकर्मी सतीश मेहता ने भारत भवन में 26 जून 2010 को किया था। 

चंदनबन में एक बाघ रोज किसी न किसी मनुष्य को खा जाता है। एक दिन गरीबी और तंगहाली से दुखी होकर पंचधारी वन की ओर चल देता है कि वह बाघ का निवाला बन जाएगा। परंतु बाघ उसे खाता नहीं, बल्कि उसकी मदद करने लगता है। अत्यंत ही रोचक कथानक के साथ इस नाटक में मनुष्य और प्रकृति के अंतरसंबंधों को दिखाया गया है। प्रसिद्ध रचनाकार विजय दानदेथा की कहानी पर आधारित इस नाटक का पहला मंचन विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान द्वारा अजय मुखर्जी के निर्देशन में प्रयाग में किया गया। इसके बाद शिमला के गैती हाल में भी हुआ। 

चोरी, भ्रष्टाचार, और तमाम तरह की अनैतिकताओं के इस दौर में आखिर समाज चल कैसे रहा है ? एक से बढ़ कर एक बेईमान हैं, फिर भी कानून, व्यवस्था कायम है ? आखिर राज क्या है ? हास्यात्मक घटनाओं से भरपूर ऐसे ही सवालों को उठाता यह नाटक एक धूर्त कथा पर आधारित है। मोहन राकेश पुरस्कार प्राप्त इस नाटक का पहला मंचन नई दिल्ली के श्रीराम सेंटर में 23 मार्च 2012 को प्रसिद्ध निर्देशकबंसी कौल ने अपने रंग समूह 'रंग विदूषक' के माध्यम से किया था। दूसरा मंचन भारत भवन में उसी साल 6 अप्रैल को किया। 

चंदनबन का बाघ 

वैश्वीकरण का असर भारतीय समाज में कुछ ऐसा पड़ा है कि बच्चों को उसने माँ-बाप से छीन लिया है। वो न केवल उनसे भौतिक रूप से दूर हो गए हैं, बल्कि उनके मानसिक जगत में भी अपनी जड़ों के प्रति मोह घट गया है। ऐसे में बूढ़े हो रहे माँ-बाप क्या करें ...  । कुछ ऐसे ही कथानक को समेटे इस नाटक का पहला मंचन सुपरिचित रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता राजीव वर्मा ने भारत भवन में 13 नवम्बर 2005 को किया था। 

तीसरा मंतर 

शत्रुगंध 

जनजातीय संग्रहालय भोपाल मंच पर 'तीसरा मंतर' के प्रदर्शन के बाद 

         अप्रकाशित/अमंचित चार प्रमुख नाटक 


     

 


वाराणसी के राजा सेनक की दोस्ती एक नागराज से थी। जान बचाने के एवज में नागराज राजा को एक मंत्र देता है, कि वह इस मंत्र को पढ़ कर जब चाहे सुंदरी नागकन्या को देख सकता है, और चाहे तो उसे अपने पास बुला सकता है। एक बार जब वह प्रयोग के स्तर पर नागकन्या का आह्वान क्या करता है, उसकी मुसीबतों की शुरुआत  हो जाती है। 

एक जातक कथा पर आधारित  गीत, संगीत से भरपूर इस नाटक का पहला मंचन रंग त्रिवेणी नाट्य समूह भोपाल द्वारासंजय उपाध्याय के निर्देशन में जनजातीय संग्रहालय नाट्य मंच भोपाल में  किया गया।